बा. ब्र. पं. श्री सुमतप्रकाश जी

॥ आत्मा हूँ, आनंद करो ॥

पं. श्री सुमतप्रकाश जी के बारे में

जीवन जीने की कला

जैन सिद्धांतों के आधार पर अपनी समस्याओं का समाधान कैसे करें और सुखमय जीवन कैसे जिएं। आत्मा स्वभाव से ही आनन्दमय है, किन्तु हमारा जीवन प्रायः दुखों से भरा हुआ है। यह चर्चा उस अंतर को पाटने का प्रयत्न है। हमें चाहिए कि हम मार्गदर्शन विशेषज्ञों से लें—जैसे अपने माता-पिता, आचार्यगण और आध्यात्मिक गुरु—न कि केवल मित्रों पर निर्भर रहें।

दर्शन, ज्ञान व चारित्र (अनुयोग)

प्रवचन

ब्र. श्री सुमत प्रकाश जी एक सम्मानित जैन विद्वान हैं, जिनके प्रवचन आज की व्यस्त जीवनशैली में शांति, सम्यक् दृष्टिकोण और आध्यात्मिक संतुलन का मार्ग दिखाते हैं। उनके प्रवचन सरल भाषा में गहरे दार्शनिक संदेश पहुँचाते हैं, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति लाभान्वित हो सके। उनकी वाणी का मूल आधार **रत्नत्रय धर्म** है—**सम्यग्दर्शन (सही दृष्टि), सम्यक्ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक्चारित्र (सही आचरण)**। आप समझाते हैं कि आत्मा स्वभाव से ही आनन्दमय है, लेकिन अज्ञान और आसक्ति के कारण मनुष्य दुःख और तनाव में जीता है। इस स्थिति से मुक्ति पाने का उपाय रत्नत्रय के आचरण में निहित है।

रचनाएं

ब्र.श्री सुमत प्रकाश जी के प्रवचनों के साथ-साथ उनकी लिखी हुई रचनाएँ भी साधकों और समाज के लिए अमूल्य धरोहर हैं। उनकी रचनाओं में गहन दार्शनिक चिंतन और व्यावहारिक जीवन के मार्गदर्शन का सुंदर समन्वय मिलता है। सरल भाषा और स्पष्ट विचारों के माध्यम से वे जटिल आध्यात्मिक सिद्धांतों को सहज बना देते हैं। उनकी कृतियों का मूल स्वर **सम्यग्दर्शन, सम्यक्ज्ञान और सम्यक्चारित्र** की ओर उन्मुख है। चाहे वह आत्मा की शुद्धता पर हो, अहिंसा और अपरिग्रह पर, या संयम और साधना पर—हर रचना साधक को भीतर झाँकने और आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होने का आह्वान करती है।

Audio-Visuals

ब्र.श्री सुमत प्रकाश जी के प्रवचन केवल लिखित रचनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके **ऑडियो-विज़ुअल्स** भी साधकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी हैं। उनके प्रवचनों की श्रृंखलाएँ आज डिजिटल युग में विशेष लोकप्रियता प्राप्त कर रही हैं। विशेष रूप से **YouTube** पर उनके प्रवचन लाखों दर्शकों तक पहुँच रहे हैं, जहाँ लोग उन्हें कभी भी और कहीं भी सुन और देख सकते हैं। इन प्रवचनों में जैन धर्म के गूढ़ सिद्धांतों को सरल और व्यावहारिक भाषा में प्रस्तुत किया जाता है। वे बताते हैं कि कैसे **सम्यग्दर्शन, सम्यक्ज्ञान और सम्यक्चारित्र** के अनुपालन से जीवन के तनाव और दुःख को दूर कर आत्मिक शांति प्राप्त की जा सकती है।

संस्थाएं

उपलब्ध संस्थाएं

ब्र. श्री सुमत प्रकाश जी के मार्गदर्शन में समय-समय पर अनेक धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की स्थापना हुई है। इन संस्थाओं का उद्देश्य जैन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाज के उत्थान और मानवीय मूल्यों की रक्षा करना है। इन संस्थाओं के माध्यम से प्रवचन, स्वाध्याय, ध्यान शिविर और संस्कार वर्ग जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहाँ बच्चों और युवाओं को नैतिक शिक्षा, संस्कार और जीवन की व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। साथ ही समाज के निर्धन वर्ग की सहायता, स्वास्थ्य शिविर और पर्यावरण संरक्षण जैसे सेवा कार्य भी संचालित किए जाते हैं।

निर्माणाधीन संस्थाएं

आज से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व, आचार्य कुंदकुंद देव ने सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्र रूप साम्यभाव के आश्रम की उद्घोषणा की थी, जिसका ना तो कोई निर्माण था और न ही कोई अधिष्ठाता । वह तो आत्मा की ही निर्मल पर्यायों से बना हुआ एक आनंदमय निकेतन था । भगवान महावीर से लेकर आचार्य कुंदकुंद और उनसे लेकर वर्तमान के समस्त ज्ञानियों तक मोक्षमार्ग की, अर्थात् परस्पर में भगवान देखते हुए भगवान बनने की, जो संस्कृति अनवरत चली आई है, उसी धारा में आ. बाल ब्र. पंडित श्री सुमतप्रकाश जी ने “आ. श्री कुंदकुंद साधना वसदि, सम्मेदशिखर” की परिकल्पना की है ।

प्रस्तावित संस्थाएं

श्री जैन-पथिक समाधि वसदि 1. यहाँ पर समाधि हेतु योग्य निर्यापक बनने का प्रशिक्षण दिया जायेगा, साथ ही वृद्ध समाधिस्थ जनों की वात्सल्यमयी समाधि कराइ जाएगी । 2. इसी वसदि में साधकों की अहिंसक एवं आगम सम्मत योग्य विधि के आधार से आरोग्य व्यवस्था की जायेगी, जिसका नाम “जैन-पथिक” (जैनोपैथी) है । भविष्य में इस विषय में अध्ययन एवं शोध के लिए “श्री जैन-पथिक (जैनोपैथी) अध्ययन एवं चिकित्सा केंद्र” की स्थापना होगी ।

कार्यक्रम

International Commercial Agency for connecting Buyers and Sellers of Bulk Agro-Commodities & Petroleum Products  in Global Market

India Office

USA Office:

Dubai Office:

Trade Notices:

  1. Wheat Export Ban Notification – Min. of Commerce, GOI
  2. Export Policy of Rice – Min. of Commerce, GOI